Tuesday, June 25, 2019

Rakesh Choubey

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=610765926100636&set=pb.100015017024757.-2207520000.1561520645.&type=3&theate
  • यह सोचना हीं सबसे बड़ा पाप है कि मैं निर्बल हूँ या दूसरे लोग कमजोर हैं.
  • अगर धन का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए नहीं किया जाता है, तो धन बोझ बन जाता है.
    और उस बोझ तले व्यक्ति दबता चला जाता है.
  • उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक कि तुम अपने लक्ष्य को नहीं पा लेते हो.
  • जब तक जीवित हो तब तक अपने और दूसरों के अनुभवों से सीखते रहना चाहिए.
    क्योंकि अनुभव सबसे बड़ा गुरु होता है.
  • ब्रम्हाण्ड की सारी शक्तियाँ पहले से हीं हमारे भीतर मौजूद हैं. हम हीं मूर्खता पूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आँखों को ढंक लेते हैं….. और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अँधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है.
  • निरंतर सीखते रहना हीं जीवन है और रुक जाना हीं मृत्यु है.
  • ठोकरें खाने के बाद हीं अच्छे चरित्र का निर्माण होता है.
  • लोग तुम्हारी प्रशंसा करें या आलोचना, तुम्हारे पास धन हो या नहीं हो, तुम्हारी मृत्यु आज हो या बड़े समय बाद हो, तुम्हें पथभ्रष्ट कभी नहीं होना चाहिए.

No comments:

Post a Comment